श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 57: संजयद्वारा पाण्डवोंकी युद्धविषयक तैयारीका वर्णन, धृतराष्ट्रका विलाप, दुर्योधनद्वारा अपनी प्रबलताका प्रतिपादन, धृतराष्ट्रका उसपर अविश्वास तथा संजयद्वारा धृष्टद्युम्नकी शक्ति एवं संदेशका कथन  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  5.57.8 
जारासंधिर्मागधश्च धृष्टकेतुश्च चेदिराट्।
पृथक् पृथगनुप्राप्तौ पृथगक्षौहिणीवृतौ॥ ८॥
 
 
अनुवाद
जरासंध का पुत्र, मगध का राजा सहदेव और चेदि का राजा धृष्टकेतु- ये दोनों भी एक-एक अक्षौहिणी सेना लेकर अलग-अलग आये हैं। 8.
 
Jarasandha's son, Magadhan's king Sahadeva and Chedi's king Dhrishtaketu - both of them have also come separately with an Akshauhini army each. 8.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)