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mahabharat 5.57.61: इस पृथ्वी पर सव्यसाची के पुत्र अर्जुन के समान वीर और सत्यनिष्ठ कोई दूसरा योद्धा नहीं है ॥61॥   |   mahabharat अध्याय 5.57: संजयद्वारा पाण्डवोंकी युद्धविषयक तैयारीका वर्णन, धृतराष्ट्रका विलाप, दुर्योधनद्वारा अपनी प्रबलताका प्रतिपादन, धृतराष्ट्रका उसपर अविश्वास तथा संजयद्वारा धृष्टद्युम्नकी शक्ति एवं संदेशका कथन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 57: संजयद्वारा पाण्डवोंकी युद्धविषयक तैयारीका वर्णन, धृतराष्ट्रका विलाप, दुर्योधनद्वारा अपनी प्रबलताका प्रतिपादन, धृतराष्ट्रका उसपर अविश्वास तथा संजयद्वारा धृष्टद्युम्नकी शक्ति एवं संदेशका कथन  »  श्लोक 61
 
 
श्लोक  5.57.61 
नैतादृशो हि योधोऽस्ति पृथिव्यामिह कश्चन।
यथाविध: सव्यसाची पाण्डव: सत्यविक्रम:॥ ६१॥
 
 
अनुवाद
इस पृथ्वी पर सव्यसाची के पुत्र अर्जुन के समान वीर और सत्यनिष्ठ कोई दूसरा योद्धा नहीं है ॥61॥
 
There is no other warrior on this earth like Arjun, son of Savyasachi, who is as brave and truthful. 61॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)