श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 57: संजयद्वारा पाण्डवोंकी युद्धविषयक तैयारीका वर्णन, धृतराष्ट्रका विलाप, दुर्योधनद्वारा अपनी प्रबलताका प्रतिपादन, धृतराष्ट्रका उसपर अविश्वास तथा संजयद्वारा धृष्टद्युम्नकी शक्ति एवं संदेशका कथन  »  श्लोक 60
 
 
श्लोक  5.57.60 
युधिष्ठिर: साधुनैवाभ्युपेयो
मा वो वधीदर्जुनो देवगुप्त:।
राज्यं दद्ध्वं धर्मराजस्य तूर्णं
याचध्वं वै पाण्डवं लोकवीरम्॥ ६०॥
 
 
अनुवाद
(वह सन्देश इस प्रकार है-) 'कौरवों! राजा युधिष्ठिर को केवल सदाचार से ही वश में किया जा सकता है (युद्ध से नहीं)। ऐसा अवसर न आने दो कि देवताओं द्वारा रक्षित वीर अर्जुन तुम सबका वध कर डाले। तुम लोग तुरन्त धर्मराज युधिष्ठिर को राज्य सौंप दो और विश्वविख्यात पराक्रमी पाण्डवपुत्र अर्जुन से क्षमा मांगो।'
 
(That message is as follows-) 'Kauravas! King Yudhishthira can be controlled only by good behaviour (not by war). Do not let such an opportunity come that the valiant Arjuna, protected by the gods, kills you all. Immediately hand over the kingdom to Dharmaraja Yudhishthira and seek forgiveness from the world-renowned valiant Pandava son Arjuna.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)