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mahabharat 5.57.57-59: जब कुन्तीपुत्र युधिष्ठिर इस प्रकार कह रहे थे, तब धृष्टद्युम्न ने निर्भय होकर मुझसे कहा, 'पुत्र! शीघ्र जाकर मेरा यह सन्देश वहाँ उपस्थित दुर्योधन के सभी योद्धाओं को, देश के सभी नागरिकों को, बाह्लीक आदि प्रतीपवंशी कौरवों को, शरद्वान के पुत्र कृपाचार्य को, सूतपुत्र कर्ण को, द्रोणाचार्य और अश्वत्थामा को, तथा जयद्रथ, दु:शासन, विकर्ण, राजा दुर्योधन और भीष्म को सुना दो। अभी जाओ, विलम्ब न करो।'   |   mahabharat अध्याय 5.57: संजयद्वारा पाण्डवोंकी युद्धविषयक तैयारीका वर्णन, धृतराष्ट्रका विलाप, दुर्योधनद्वारा अपनी प्रबलताका प्रतिपादन, धृतराष्ट्रका उसपर अविश्वास तथा संजयद्वारा धृष्टद्युम्नकी शक्ति एवं संदेशका कथन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 57: संजयद्वारा पाण्डवोंकी युद्धविषयक तैयारीका वर्णन, धृतराष्ट्रका विलाप, दुर्योधनद्वारा अपनी प्रबलताका प्रतिपादन, धृतराष्ट्रका उसपर अविश्वास तथा संजयद्वारा धृष्टद्युम्नकी शक्ति एवं संदेशका कथन  »  श्लोक 57-59
 
 
श्लोक  5.57.57-59 
एवं ब्रुवति कौन्तेये धर्मात्मनि युधिष्ठिरे।
धृष्टद्युम्न उवाचेदं मां वचो गतसाध्वसम्।
सर्वाञ्जनपदान् सूत योधा दुर्योधनस्य ये॥ ५७॥
सबाह्लिकान् कुरून् ब्रूया: प्रातिपेयाञ्शरद्वत:।
सूतपुत्रं तथा द्रोणं सहपुत्रं जयद्रथम्॥ ५८॥
दु:शासनं विकर्णं च तथा दुर्योधनं नृपम्।
भीष्मं च ब्रूहि गत्वा त्वमाशु गच्छ च मा चिरम्॥ ५९॥
 
 
अनुवाद
जब कुन्तीपुत्र युधिष्ठिर इस प्रकार कह रहे थे, तब धृष्टद्युम्न ने निर्भय होकर मुझसे कहा, 'पुत्र! शीघ्र जाकर मेरा यह सन्देश वहाँ उपस्थित दुर्योधन के सभी योद्धाओं को, देश के सभी नागरिकों को, बाह्लीक आदि प्रतीपवंशी कौरवों को, शरद्वान के पुत्र कृपाचार्य को, सूतपुत्र कर्ण को, द्रोणाचार्य और अश्वत्थामा को, तथा जयद्रथ, दु:शासन, विकर्ण, राजा दुर्योधन और भीष्म को सुना दो। अभी जाओ, विलम्ब न करो।'
 
When the righteous son of Kunti, Yudhishthira, was speaking thus, Dhrishtadyumna spoke to me fearlessly, 'Son! Go quickly and convey this message of mine to all the warriors of Duryodhan who are there, to all the citizens of the country, to the Kauravas of the Pratip dynasty like Bahlik, to Sharadwan's son Kripacharya, to Suta's son Karna, to Dronacharya and Ashwatthama, and also to Jayadratha, Dushasan, Vikarna, King Duryodhan and Bhishma. Go now, do not delay.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)