श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 57: संजयद्वारा पाण्डवोंकी युद्धविषयक तैयारीका वर्णन, धृतराष्ट्रका विलाप, दुर्योधनद्वारा अपनी प्रबलताका प्रतिपादन, धृतराष्ट्रका उसपर अविश्वास तथा संजयद्वारा धृष्टद्युम्नकी शक्ति एवं संदेशका कथन  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  5.57.56 
स त्वं शूरश्च वीरश्च विक्रान्तश्च नरर्षभ।
भयार्तानां परित्राता संयुगेषु न संशय:॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
हे पुरुषोत्तम! इसमें कोई संदेह नहीं कि आप वीर, पराक्रमी और साहसी हैं तथा युद्ध में भय से पीड़ित सैनिकों की रक्षा कर सकते हैं।'
 
O best of men! There is no doubt that you are brave, valiant and courageous and you can protect the soldiers suffering from fear in the war.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)