श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 57: संजयद्वारा पाण्डवोंकी युद्धविषयक तैयारीका वर्णन, धृतराष्ट्रका विलाप, दुर्योधनद्वारा अपनी प्रबलताका प्रतिपादन, धृतराष्ट्रका उसपर अविश्वास तथा संजयद्वारा धृष्टद्युम्नकी शक्ति एवं संदेशका कथन  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  5.57.50 
भीष्मं द्रोणं कृपं कर्णं द्रौणिं शल्यं सुयोधनम्।
एतांश्चापि निरोत्स्यामि वेलेव मकरालयम्॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
भीष्म, द्रोण, कृपाचार्य, कर्ण, अश्वत्थामा, शल्य और दुर्योधन - इन सबको मैं आगे बढ़ने से वैसे ही रोक दूँगा जैसे किनारा समुद्र को रोक देता है।॥50॥
 
Bhishma, Drona, Krupacharya, Karna, Ashwatthama, Shalya and Duryodhana - I will stop them all from advancing just as the shore stops the ocean.'॥ 50॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)