Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 5.57.47: संजय ने कहा, "भरत! धृष्टद्युम्न इन पाण्डवों को सदैव उत्तेजित करता रहता है। वह कहता है, 'भरत के कुल के रत्न पाण्डवों! तुम सब लोग युद्ध करो, उससे तनिक भी न डरो।' 47.   |   mahabharat अध्याय 5.57: संजयद्वारा पाण्डवोंकी युद्धविषयक तैयारीका वर्णन, धृतराष्ट्रका विलाप, दुर्योधनद्वारा अपनी प्रबलताका प्रतिपादन, धृतराष्ट्रका उसपर अविश्वास तथा संजयद्वारा धृष्टद्युम्नकी शक्ति एवं संदेशका कथन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 57: संजयद्वारा पाण्डवोंकी युद्धविषयक तैयारीका वर्णन, धृतराष्ट्रका विलाप, दुर्योधनद्वारा अपनी प्रबलताका प्रतिपादन, धृतराष्ट्रका उसपर अविश्वास तथा संजयद्वारा धृष्टद्युम्नकी शक्ति एवं संदेशका कथन  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  5.57.47 
संजय उवाच
धृष्टद्युम्न: सदैवैतान् संदीपयति भारत।
युद्धॺध्वमिति मा भैष्ट युद्धाद् भरतसत्तमा:॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
संजय ने कहा, "भरत! धृष्टद्युम्न इन पाण्डवों को सदैव उत्तेजित करता रहता है। वह कहता है, 'भरत के कुल के रत्न पाण्डवों! तुम सब लोग युद्ध करो, उससे तनिक भी न डरो।' 47.
 
Sanjaya said, "Bharata! Dhrishtadyumna always keeps on provoking these Pandavas. He says, 'Pandavas, the jewels of Bharat's clan! You all should fight the war, do not be afraid of it at all. 47.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)