Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.57.45-46: संजय! तुम मुझे पाण्डवों के पुरुषार्थ का पुनः वर्णन करो। वह कौन वीर योद्धा है जो तीव्र एवं तेजस्वी धनुर्धर पाण्डवों को बार-बार उसी प्रकार उत्तेजित कर रहा है, जैसे घी की आहुति देने से अग्नि प्रज्वलित हो जाती है? | mahabharat अध्याय 5.57: संजयद्वारा पाण्डवोंकी युद्धविषयक तैयारीका वर्णन, धृतराष्ट्रका विलाप, दुर्योधनद्वारा अपनी प्रबलताका प्रतिपादन, धृतराष्ट्रका उसपर अविश्वास तथा संजयद्वारा धृष्टद्युम्नकी शक्ति एवं संदेशका कथन । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
संजय! तुम मुझे पाण्डवों के पुरुषार्थ का पुनः वर्णन करो। वह कौन वीर योद्धा है जो तीव्र एवं तेजस्वी धनुर्धर पाण्डवों को बार-बार उसी प्रकार उत्तेजित कर रहा है, जैसे घी की आहुति देने से अग्नि प्रज्वलित हो जाती है?
Sanjaya! You once again describe to me the efforts of the Pandavas. Who is that brave warrior who repeatedly provokes the swift and brilliant archer Pandavas in the same way as a fire is ignited by offering ghee?
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥