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श्री महाभारत
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पर्व 5: उद्योग पर्व
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अध्याय 57: संजयद्वारा पाण्डवोंकी युद्धविषयक तैयारीका वर्णन, धृतराष्ट्रका विलाप, दुर्योधनद्वारा अपनी प्रबलताका प्रतिपादन, धृतराष्ट्रका उसपर अविश्वास तथा संजयद्वारा धृष्टद्युम्नकी शक्ति एवं संदेशका कथन
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श्लोक 43
श्लोक
5.57.43
धृतराष्ट्र उवाच
उन्मत्त इव मे पुत्रो विलपत्येष संजय।
न हि शक्तो रणे जेतुं धर्मराजं युधिष्ठिरम्॥ ४३॥
अनुवाद
धृतराष्ट्र बोले- संजय! यह मेरा पुत्र पागलों जैसी बातें कर रहा है। यह धर्मराज युधिष्ठिर को युद्ध में कभी नहीं हरा सकता।
Dhritarashtra said— Sanjay! This son of mine is talking like a madman. He can never defeat Dharmaraja Yudhishthira in battle.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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