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श्री महाभारत
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पर्व 5: उद्योग पर्व
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अध्याय 57: संजयद्वारा पाण्डवोंकी युद्धविषयक तैयारीका वर्णन, धृतराष्ट्रका विलाप, दुर्योधनद्वारा अपनी प्रबलताका प्रतिपादन, धृतराष्ट्रका उसपर अविश्वास तथा संजयद्वारा धृष्टद्युम्नकी शक्ति एवं संदेशका कथन
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श्लोक 42
श्लोक
5.57.42
महता रथवंशेन शरजालैश्च मामकै:।
अभिद्रुता भविष्यन्ति पञ्चाला: पाण्डवै: सह॥ ४२॥
अनुवाद
मेरे पक्ष की विशाल रथसेना और मेरे सैनिकों की बाणों की वर्षा से घायल होकर पांचाल और पाण्डव भाग जाएँगे ॥ 42॥
Wounded by my side's large chariot army and the shower of arrows from my soldiers, the Panchalas and the Pandavas will flee. ॥ 42॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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