श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 57: संजयद्वारा पाण्डवोंकी युद्धविषयक तैयारीका वर्णन, धृतराष्ट्रका विलाप, दुर्योधनद्वारा अपनी प्रबलताका प्रतिपादन, धृतराष्ट्रका उसपर अविश्वास तथा संजयद्वारा धृष्टद्युम्नकी शक्ति एवं संदेशका कथन  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  5.57.41 
मत्प्रियं पार्थिवा: सर्वे ये चिकीर्षन्ति भारत।
ते तानावारयिष्यन्ति ऐणेयानिव तन्तुना॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
हे भरतपुत्र! जो राजा मुझे प्रसन्न करना चाहते हैं, वे पाण्डवों को आगे बढ़ने से उसी प्रकार रोक देंगे, जैसे मृगशिराओं को जाल से रोका जाता है।
 
O son of Bharata! All those kings who wish to please me will stop the Pandavas from advancing just as the fawns are stopped by a snare.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)