श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 57: संजयद्वारा पाण्डवोंकी युद्धविषयक तैयारीका वर्णन, धृतराष्ट्रका विलाप, दुर्योधनद्वारा अपनी प्रबलताका प्रतिपादन, धृतराष्ट्रका उसपर अविश्वास तथा संजयद्वारा धृष्टद्युम्नकी शक्ति एवं संदेशका कथन  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  5.57.40 
न मामकान् पाण्डवास्ते समर्था: प्रतिवीक्षितुम्।
पराक्रान्तो ह्यहं पाण्डून् सपुत्रान् योद्‍धुमाहवे॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
पाण्डव मेरे पक्ष के इन वीर योद्धाओं की ओर देखने में भी समर्थ नहीं हैं। केवल मुझमें ही इतनी शक्ति है कि मैं पाण्डवों के साथ उनके पुत्रों सहित रणभूमि में युद्ध कर सकूँ।
 
The Pandavas are not even capable of looking at these brave warriors of my side. I alone have the power to fight in the battlefield with the Pandavas along with their sons.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)