श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 57: संजयद्वारा पाण्डवोंकी युद्धविषयक तैयारीका वर्णन, धृतराष्ट्रका विलाप, दुर्योधनद्वारा अपनी प्रबलताका प्रतिपादन, धृतराष्ट्रका उसपर अविश्वास तथा संजयद्वारा धृष्टद्युम्नकी शक्ति एवं संदेशका कथन  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  5.57.39 
सर्वे च पृथिवीपाला मदर्थे तात पाण्डवान्।
आर्या: शस्त्रभृत: शूरा: समर्था: प्रतिबाधितुम्॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
हे प्रिये! ये सभी राजा महान, शस्त्रधारी और पराक्रमी योद्धा होने के साथ-साथ मेरे लिए पाण्डवों को कष्ट देने में भी समर्थ हैं।
 
O dear! All these kings, besides being great, armed and valiant warriors, are also capable of tormenting the Pandavas for my sake.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)