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mahabharat 5.57.36: दुर्योधन ने कहा- पिताश्री! हम कौरव और पाण्डव एक ही जाति के हैं और दोनों इसी भूमि पर रहते हैं। फिर आपने यह धारणा कैसे बना ली कि पाण्डव ही विजयी होंगे?॥ 36॥   |   mahabharat अध्याय 5.57: संजयद्वारा पाण्डवोंकी युद्धविषयक तैयारीका वर्णन, धृतराष्ट्रका विलाप, दुर्योधनद्वारा अपनी प्रबलताका प्रतिपादन, धृतराष्ट्रका उसपर अविश्वास तथा संजयद्वारा धृष्टद्युम्नकी शक्ति एवं संदेशका कथन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 57: संजयद्वारा पाण्डवोंकी युद्धविषयक तैयारीका वर्णन, धृतराष्ट्रका विलाप, दुर्योधनद्वारा अपनी प्रबलताका प्रतिपादन, धृतराष्ट्रका उसपर अविश्वास तथा संजयद्वारा धृष्टद्युम्नकी शक्ति एवं संदेशका कथन  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  5.57.36 
दुर्योधन उवाच
उभौ स्व एकजातीयौ तथोभौ भूमिगोचरौ।
अथ कस्मात् पाण्डवानामेकतो मन्यसे जयम्॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
दुर्योधन ने कहा- पिताश्री! हम कौरव और पाण्डव एक ही जाति के हैं और दोनों इसी भूमि पर रहते हैं। फिर आपने यह धारणा कैसे बना ली कि पाण्डव ही विजयी होंगे?॥ 36॥
 
Duryodhan said— Father! We Kauravas and Pandavas are of the same caste and both live on this land. Then how did you form this notion that only the Pandavas will be victorious?॥ 36॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)