श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 57: संजयद्वारा पाण्डवोंकी युद्धविषयक तैयारीका वर्णन, धृतराष्ट्रका विलाप, दुर्योधनद्वारा अपनी प्रबलताका प्रतिपादन, धृतराष्ट्रका उसपर अविश्वास तथा संजयद्वारा धृष्टद्युम्नकी शक्ति एवं संदेशका कथन  »  श्लोक 30-35
 
 
श्लोक  5.57.30-35 
येषां युधिष्ठिरो नेता गोप्ता च मधुसूदन:।
योधौ च पाण्डवौ वीरौ सव्यसाचिवृकोदरौ॥ ३०॥
नकुल: सहदेवश्च धृष्टद्युम्नश्च पार्षत:।
सात्यकिर्द्रुपदश्चैव धृष्टकेतुश्च सानुज:॥ ३१॥
उत्तमौजाश्च पाञ्चाल्यो युधामन्युश्च दुर्जय:।
शिखण्डी क्षत्रदेवश्च तथा वैराटिरुत्तर:॥ ३२॥
काशयश्चेदयश्चैव मत्स्या: सर्वे च सृंजया:।
विराटपुत्रो बभ्रुश्च पञ्चालाश्च प्रभद्रका:॥ ३३॥
येषामिन्द्रोऽप्यकामानां न हरेत् पृथिवीमिमाम्।
वीराणां रणधीराणां ये भिन्द्यु: पर्वतानपि॥ ३४॥
तान् सर्वगुणसम्पन्नानमनुष्यप्रतापिन:।
क्रोशतो मम दुष्पुत्रो योद्‍धुमिच्छति संजय॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
संजय! युधिष्ठिर पाण्डवों के नायक हैं, भगवान मधुसूदन पाण्डवों के रक्षक हैं, पाण्डुपुत्र अर्जुन और भीमसेन प्रमुख योद्धा हैं, नकुल, सहदेव, पृष्टवंशी धृष्टद्युम्न, सात्यकि, द्रुपद, धृष्टकेतु, सुकेतु, पांचाल देश के उत्तमौजा, दुर्जय युधमन्यु, शिखण्डी, क्षत्रदेव, विराटकुमार उत्तर, काशी, चेदि और मत्स्य देश के सैनिक, संजयवंशी क्षत्रिय, विराटकुमार बभ्रु और पांचाल देश के प्रभद्रक जिनकी ओर से युद्ध करने के लिए उद्यत हैं, जिनकी इच्छा के बिना देवताओं के राजा इन्द्र भी इस पृथ्वी का हरण नहीं कर सकते, जो युद्ध में वीर और साहसी हैं, जो पर्वतों को भी भेद सकते हैं, जिनका तेज देवताओं के समान है और जो समस्त सद्गुणों से युक्त हैं, मेरे चीखने-चिल्लाने पर भी मेरा दुष्ट पुत्र दुर्योधन उन्हीं पाण्डवों के साथ युद्ध करना चाहता है। 30–35.
 
Sanjay! Yudhishthira is the leader of the Pandavas, Lord Madhusudan is the protector of the Pandavas, the brave sons of Pandu, Arjuna and Bhimasena are the main warriors, Nakula, Sahadeva, Dhrishtadyumna of the Prishta dynasty, Satyaki, Drupada, Dhrishtaketu, Suketu, Uttamaujas of the Panchala country, Durjaya Yudhmanyu, Shikhandi, Kshatradev, Viratkumar Uttar, the soldiers of Kashi, Chedi and Matsya country, the Kshatriyas of the Sanjaya dynasty, Viratkumar Babhru and the Prabhadrakas of the Panchala country are ready to fight on their side, without whose wish even the king of gods Indra cannot abduct this earth, who are brave and courageous in battle, who can pierce even the mountains, whose glory is like that of the gods and who are full of all good qualities, my evil son Duryodhana wants to fight with those very Pandavas, despite my screaming and shouting. 30–35.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)