श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 57: संजयद्वारा पाण्डवोंकी युद्धविषयक तैयारीका वर्णन, धृतराष्ट्रका विलाप, दुर्योधनद्वारा अपनी प्रबलताका प्रतिपादन, धृतराष्ट्रका उसपर अविश्वास तथा संजयद्वारा धृष्टद्युम्नकी शक्ति एवं संदेशका कथन  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  5.57.3 
पृथगक्षौहिणीभ्यां तु पाण्डवानभिसंश्रितौ।
महारथौ समाख्यातावुभौ पुरुषमानिनौ॥ ३॥
 
 
अनुवाद
वे दोनों प्रसिद्ध योद्धा, जो अपने को वीर योद्धा मानते थे, पाण्डवों की सहायता के लिए एक-एक अक्षौहिणी सेना लेकर अलग-अलग आये हैं।
 
Both those famous warriors, who considered themselves to be valiant warriors, have come separately with an Akshauhini army each to help the Pandavas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)