श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 57: संजयद्वारा पाण्डवोंकी युद्धविषयक तैयारीका वर्णन, धृतराष्ट्रका विलाप, दुर्योधनद्वारा अपनी प्रबलताका प्रतिपादन, धृतराष्ट्रका उसपर अविश्वास तथा संजयद्वारा धृष्टद्युम्नकी शक्ति एवं संदेशका कथन  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  5.57.29 
सर्वे ह्यतिरथा: शूरा: कीर्तिमन्त: प्रतापिन:।
सूर्यपावकयोस्तुल्यास्तेजसा समितिञ्जया:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
सभी पाण्डव अत्यंत वीर, यशस्वी, यशस्वी, युद्ध में विजयी तथा अग्नि और सूर्य के समान तेजस्वी हैं।
 
All the Pandavas are extremely brave, famous, glorious, victorious in battle and are as bright as fire and the sun.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)