Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.57.27: ऐसा प्रतीत होता है मानो मृत्यु के देवता यमराज ने संसार के समस्त राजाओं को मारने के लिए उनका प्रोक्षण (संस्कार) किया है; अतः जैसे पतंगे अग्नि में जलकर भस्म हो जाते हैं, वैसे ही ये सभी राजा गाण्डीव धनुष की अग्नि में भस्म हो जाएँगे॥ 27॥ | mahabharat अध्याय 5.57: संजयद्वारा पाण्डवोंकी युद्धविषयक तैयारीका वर्णन, धृतराष्ट्रका विलाप, दुर्योधनद्वारा अपनी प्रबलताका प्रतिपादन, धृतराष्ट्रका उसपर अविश्वास तथा संजयद्वारा धृष्टद्युम्नकी शक्ति एवं संदेशका कथन । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ऐसा प्रतीत होता है मानो मृत्यु के देवता यमराज ने संसार के समस्त राजाओं को मारने के लिए उनका प्रोक्षण (संस्कार) किया है; अतः जैसे पतंगे अग्नि में जलकर भस्म हो जाते हैं, वैसे ही ये सभी राजा गाण्डीव धनुष की अग्नि में भस्म हो जाएँगे॥ 27॥
It seems as if the God of death, Yamaraja, has performed their Prokshan (rites) in order to kill all the kings of the world; therefore, just like kites fall in fire, similarly all these kings will be consumed in the fire of the Gandiva bow.॥ 27॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥