श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 57: संजयद्वारा पाण्डवोंकी युद्धविषयक तैयारीका वर्णन, धृतराष्ट्रका विलाप, दुर्योधनद्वारा अपनी प्रबलताका प्रतिपादन, धृतराष्ट्रका उसपर अविश्वास तथा संजयद्वारा धृष्टद्युम्नकी शक्ति एवं संदेशका कथन  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  5.57.26 
धृतराष्ट्र उवाच
न सन्ति सर्वे पुत्रा मे मूढा दुर्द्यूतदेविन:।
येषां युद्धं बलवता भीमेन रणमूर्धनि॥ २६॥
 
 
अनुवाद
धृतराष्ट्र बोले, 'संजय! मेरे सभी मूर्ख पुत्र, जो मुख्य युद्धभूमि में छलपूर्वक जुआ खेल रहे हैं, अब कुछ भी नहीं हैं।' 26.
 
Dhritarashtra said, 'Sanjaya! All my foolish sons who are playing deceitful gambling in the main battleground are now worth nothing.' 26.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)