श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 57: संजयद्वारा पाण्डवोंकी युद्धविषयक तैयारीका वर्णन, धृतराष्ट्रका विलाप, दुर्योधनद्वारा अपनी प्रबलताका प्रतिपादन, धृतराष्ट्रका उसपर अविश्वास तथा संजयद्वारा धृष्टद्युम्नकी शक्ति एवं संदेशका कथन  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  5.57.23 
उलूकं चैव कैतव्यं ये च सारस्वता गणा:।
नकुल: कल्पयामास भागं माद्रवतीसुत:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
वह धूर्त जुआरी, उल्लूरूपी शकुनीकपुत्र तथा सारस्वत क्षेत्र के सैनिक, इन सबको माद्रीपुत्र नकुल ने अपना-अपना भाग दे दिया है।
 
That cunning gambler, Shakunika's son, who is an owl, and the soldiers of the Saraswat region, all of them have been assigned their share by Madri's son Nakula. 23.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)