श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 57: संजयद्वारा पाण्डवोंकी युद्धविषयक तैयारीका वर्णन, धृतराष्ट्रका विलाप, दुर्योधनद्वारा अपनी प्रबलताका प्रतिपादन, धृतराष्ट्रका उसपर अविश्वास तथा संजयद्वारा धृष्टद्युम्नकी शक्ति एवं संदेशका कथन  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  5.57.22 
सहदेवस्तु माद्रेय: शूर: संक्रन्दनो युधि।
स्वमंशं कल्पयामास श्यालं ते सुबलात्मजम्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
महाराज! युद्ध में इन्द्र के समान पराक्रमी माद्रीनाथ के पुत्र सहदेव ने अपना भाग्य आपके बहनोई सुबल के पुत्र शकुनि को सौंप दिया है।
 
Maharaj! In the war, Madrinath's son Sahadev, who is as valiant as Indra, has assigned his fate to your brother-in-law, Subala's son Shakuni.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)