श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 57: संजयद्वारा पाण्डवोंकी युद्धविषयक तैयारीका वर्णन, धृतराष्ट्रका विलाप, दुर्योधनद्वारा अपनी प्रबलताका प्रतिपादन, धृतराष्ट्रका उसपर अविश्वास तथा संजयद्वारा धृष्टद्युम्नकी शक्ति एवं संदेशका कथन  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  5.57.20 
द्रौपदेया महेष्वासा: सुवर्णविकृतध्वजा:।
धृष्टद्युम्नमुखा द्रोणमभियास्यन्ति भारत॥ २०॥
 
 
अनुवाद
हे भरतनाट्यमपुत्र! द्रौपदी के महाधनुर्धर पुत्र भी स्वर्ण ध्वजाओं से सुसज्जित होकर धृष्टद्युम्न के साथ द्रोण पर आक्रमण करेंगे।
 
O son of Bharatanatyam! The great archer sons of Draupadi, armed with golden flags, will also attack Drona along with Dhrishtadyumna.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)