Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.57.16: इनके अतिरिक्त जो अन्य राजा इस पृथ्वी पर अपने को वीर योद्धा और अजेय समझते हैं, उन सबका भाग्य कुन्तीकुमार अर्जुन ने निर्धारित कर दिया है ॥16॥ | mahabharat अध्याय 5.57: संजयद्वारा पाण्डवोंकी युद्धविषयक तैयारीका वर्णन, धृतराष्ट्रका विलाप, दुर्योधनद्वारा अपनी प्रबलताका प्रतिपादन, धृतराष्ट्रका उसपर अविश्वास तथा संजयद्वारा धृष्टद्युम्नकी शक्ति एवं संदेशका कथन । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अशक्याश्चैव ये केचित् पृथिव्यां शूरमानिन:।
सर्वांस्तानर्जुन: पार्थ: कल्पयामास भागत:॥ १६॥
अनुवाद
इनके अतिरिक्त जो अन्य राजा इस पृथ्वी पर अपने को वीर योद्धा और अजेय समझते हैं, उन सबका भाग्य कुन्तीकुमार अर्जुन ने निर्धारित कर दिया है ॥16॥
Besides these, all the other kings who consider themselves to be valiant warriors and are considered invincible on this earth, have been assigned their fate by Kuntikumar Arjun. ॥16॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥