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श्री महाभारत
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पर्व 5: उद्योग पर्व
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अध्याय 57: संजयद्वारा पाण्डवोंकी युद्धविषयक तैयारीका वर्णन, धृतराष्ट्रका विलाप, दुर्योधनद्वारा अपनी प्रबलताका प्रतिपादन, धृतराष्ट्रका उसपर अविश्वास तथा संजयद्वारा धृष्टद्युम्नकी शक्ति एवं संदेशका कथन
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श्लोक 14
श्लोक
5.57.14
दुर्योधन: सहसुत: सार्धं भ्रातृशतेन च।
प्राच्याश्च दाक्षिणात्याश्च भीमसेनस्य भागत:॥ १४॥
अनुवाद
दुर्योधन, उसके सौ भाई-पुत्रों और भीमसेन सहित पूर्व और दक्षिण की कौरव सेना को उनका भाग दे दिया गया है ॥14॥
Duryodhana along with his hundred brothers and sons, and Bhimasena, the Kaurava army from the east and south have been assigned their share. ॥14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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