श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 57: संजयद्वारा पाण्डवोंकी युद्धविषयक तैयारीका वर्णन, धृतराष्ट्रका विलाप, दुर्योधनद्वारा अपनी प्रबलताका प्रतिपादन, धृतराष्ट्रका उसपर अविश्वास तथा संजयद्वारा धृष्टद्युम्नकी शक्ति एवं संदेशका कथन  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  5.57.11 
यो वेद मानुषं व्यूहं दैवं गान्धर्वमासुरम्।
स तत्र सेनाप्रमुखे धृष्टद्युम्नो महारथ:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
मनुष्य, देवता, गन्धर्व और राक्षसों की युद्ध-विधि जानने वाले वे महारथी धृष्टद्युम्न पाण्डव सेना में सबसे आगे (सेनापति) होंगे।॥11॥
 
That great warrior Dhrishtadyumna who knows the battle formations of humans, gods, Gandharvas and even demons will be in the forefront of the Pandava army (as its commander). ॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)