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mahabharat 5.57.1: धृतराष्ट्र ने पूछा - संजय! वहाँ तुमने ऐसे कौन-से राजा देखे जो युधिष्ठिर को प्रसन्न करने के लिए आये थे और जो पाण्डवों के हित के लिए मेरे पुत्र की सेना के साथ युद्ध करने वाले थे?॥1॥   |   mahabharat अध्याय 5.57: संजयद्वारा पाण्डवोंकी युद्धविषयक तैयारीका वर्णन, धृतराष्ट्रका विलाप, दुर्योधनद्वारा अपनी प्रबलताका प्रतिपादन, धृतराष्ट्रका उसपर अविश्वास तथा संजयद्वारा धृष्टद्युम्नकी शक्ति एवं संदेशका कथन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 57: संजयद्वारा पाण्डवोंकी युद्धविषयक तैयारीका वर्णन, धृतराष्ट्रका विलाप, दुर्योधनद्वारा अपनी प्रबलताका प्रतिपादन, धृतराष्ट्रका उसपर अविश्वास तथा संजयद्वारा धृष्टद्युम्नकी शक्ति एवं संदेशका कथन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  5.57.1 
धृतराष्ट्र उवाच
कांस्तत्र संजयापश्य: प्रीत्यर्थेन समागतान्।
ये योत्स्यन्ते पाण्डवार्थे पुत्रस्य मम वाहिनीम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
धृतराष्ट्र ने पूछा - संजय! वहाँ तुमने ऐसे कौन-से राजा देखे जो युधिष्ठिर को प्रसन्न करने के लिए आये थे और जो पाण्डवों के हित के लिए मेरे पुत्र की सेना के साथ युद्ध करने वाले थे?॥1॥
 
Dhritarashtra asked - Sanjaya! Which kings did you see there who had come to please Yudhishthira and who would fight with my son's army for the benefit of the Pandavas?॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)