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श्री महाभारत
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पर्व 5: उद्योग पर्व
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अध्याय 56: संजयद्वारा अर्जुनके ध्वज एवं अश्वोंका तथा युधिष्ठिर आदिके घोड़ोंका वर्णन
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श्लोक 8
श्लोक
5.56.8
ध्वजे हि तस्मिन् रूपाणि चक्रुस्ते देवमायया।
महाधनानि दिव्यानि महान्ति च लघूनि च॥ ८॥
अनुवाद
उन तीनों ने उस ध्वजा पर दिव्य देवता की शक्ति से नाना प्रकार की छोटी-बड़ी बहुमूल्य एवं दिव्य मूर्तियाँ निर्मित कीं ॥8॥
Those three have created various kinds of precious and divine idols, big and small, on that flag through the power of the divine deity. ॥ 8॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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