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mahabharat 5.56.4: उस समय स्वर्ण कवच धारण किये हुए अर्जुन, विद्युत् की प्रभा से सुशोभित मेघ के समान हमारे सामने प्रकट हुए। उन्होंने उन मन्त्रों का सब ओर से मनन करके हर्ष और प्रसन्नतापूर्वक मुझसे कहा -   |   mahabharat अध्याय 5.56: संजयद्वारा अर्जुनके ध्वज एवं अश्वोंका तथा युधिष्ठिर आदिके घोड़ोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 56: संजयद्वारा अर्जुनके ध्वज एवं अश्वोंका तथा युधिष्ठिर आदिके घोड़ोंका वर्णन  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  5.56.4 
तमपश्याम संनद्धं मेघं विद्युद्युतं यथा।
समन्तात् समभिध्याय हृष्यमाणोऽभ्यभाषत॥ ४॥
 
 
अनुवाद
उस समय स्वर्ण कवच धारण किये हुए अर्जुन, विद्युत् की प्रभा से सुशोभित मेघ के समान हमारे सामने प्रकट हुए। उन्होंने उन मन्त्रों का सब ओर से मनन करके हर्ष और प्रसन्नतापूर्वक मुझसे कहा -
 
At that time Arjuna, wearing a golden armour, appeared to us like a cloud adorned with the light of lightning. After contemplating those mantras from all sides, he said to me in joy and delight -
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)