श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 56: संजयद्वारा अर्जुनके ध्वज एवं अश्वोंका तथा युधिष्ठिर आदिके घोड़ोंका वर्णन  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  5.56.3 
रथं तु दिव्यं कौन्तेय: सर्वा विभ्राजयन् दिश:।
मन्त्रं जिज्ञासमान: सन् बीभत्सु: समयोजयत्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
कुन्तीकुमार अर्जुन ने अस्त्र-शस्त्र के प्रयोग सम्बन्धी मन्त्र की परीक्षा करने के लिए अपने दिव्य रथ को उसके प्रकाश से सम्पूर्ण दिशाओं को प्रकाशित करते हुए जोत दिया था।
 
Kuntikumar Arjun had plowed his divine chariot, illuminating all the directions with its light, to test the mantra related to the use of weapons.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)