श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 56: संजयद्वारा अर्जुनके ध्वज एवं अश्वोंका तथा युधिष्ठिर आदिके घोड़ोंका वर्णन  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  5.56.15 
कल्माषाङ्गास्तित्तिरिचित्रपृष्ठा
भ्रात्रा दत्ता: प्रीयता फाल्गुनेन।
भ्रातुर्वीरस्य स्वैस्तुरङ्गैर्विशिष्टा
मुदा युक्ता: सहदेवं वहन्ति॥ १५॥
 
 
अनुवाद
जो घोड़े अर्जुन ने अपने छोटे भाई सहदेव को प्रसन्नतापूर्वक दान में दिए थे, जिनके सम्पूर्ण शरीर विचित्र रंग के थे और जिनकी पीठ भी तीतर की पीठ के समान चित्तीदार थी तथा जो अर्जुन के अपने घोड़ों से भी श्रेष्ठ थे, ऐसे सुन्दर घोड़े सहदेव के रथ का भार प्रसन्नतापूर्वक ढो रहे थे॥ 15॥
 
The horses which Arjuna had happily gifted to his younger brother Sahadeva, whose entire body was of strange colors and whose backs too appeared spotted like those of a partridge and which were even better than Arjuna's own horses, such beautiful horses gladly carried the load of Sahadeva's chariot.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)