Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 5.56.12: जैसे अग्नि से निकला धुआँ विचित्र तेजोमय रूप और रंग धारण करके सब दिशाओं में फैलकर आकाश की ओर उठता है, उसी प्रकार विश्वकर्मा ने उस ध्वज का निर्माण किया है। उसके कारण रथ पर कोई भार नहीं पड़ता और न ही उसकी गति में कोई बाधा उत्पन्न होती है॥12॥   |   mahabharat अध्याय 5.56: संजयद्वारा अर्जुनके ध्वज एवं अश्वोंका तथा युधिष्ठिर आदिके घोड़ोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 56: संजयद्वारा अर्जुनके ध्वज एवं अश्वोंका तथा युधिष्ठिर आदिके घोड़ोंका वर्णन  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  5.56.12 
यथाग्निधूमो दिवमेति रुद्‍ध्वा
वर्णान् बिभ्रत् तैजसांश्चित्ररूपान्।
तथा ध्वजो विहितो भौमनेन
न चेद् भारो भविता नोत रोध:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
जैसे अग्नि से निकला धुआँ विचित्र तेजोमय रूप और रंग धारण करके सब दिशाओं में फैलकर आकाश की ओर उठता है, उसी प्रकार विश्वकर्मा ने उस ध्वज का निर्माण किया है। उसके कारण रथ पर कोई भार नहीं पड़ता और न ही उसकी गति में कोई बाधा उत्पन्न होती है॥12॥
 
Just as the smoke from the fire, taking on a strange effulgent shape and colour, spreads in all directions and rises towards the sky, in the same way Vishwakarma has created that flag. Because of it, no weight is added to the chariot and no obstruction is created in its movement.॥12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)