श्रुत्वा चैवं मयोक्तास्तु भीष्मद्रोणकृपास्तदा।
ज्ञातिक्षयभयाद् राजन् भीतेन भरतर्षभ॥ ७॥
न ते स्थास्यन्ति समये पाण्डवा इति मे मति:।
समुच्छेदं हि न: कृत्स्नं वासुदेवश्चिकीर्षति॥ ८॥
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! उनका यह निर्णय सुनकर मैं अपने परिवारजनों के वध की आशंका से भयभीत हो गया और मैंने भीष्म, द्रोण तथा कृपाचार्य से यह निवेदन किया - 'पिताजी! मुझे ऐसा प्रतीत होता है कि पाण्डव अपनी प्रतिज्ञा पर दृढ़ नहीं रहेंगे; क्योंकि वसुदेवनन्दन श्रीकृष्ण हम सबका समूल नाश करना चाहते हैं।
O best of the Bharatas! On hearing this decision of theirs, I became afraid of the possibility of killing of my family members and I made this request to Bhishma, Drona and Kripacharya - 'Father! It seems to me that the Pandavas will not remain steadfast to their promise; because Vasudevanandan Sri Krishna wants to completely destroy all of us.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥