एतत् सर्वं समाज्ञाय बलाग्रॺं मम भारत।
न्यूनतां पाण्डवानां च न मोहं गन्तुमर्हसि॥ ६८॥
अनुवाद
हे भरतपुत्र! इन सब बातों में मेरा बल अधिक है और पाण्डवों का बल बहुत कम है; ऐसा जानकर तुम्हें चिन्ता और अधीरता नहीं करनी चाहिए ॥ 68॥
O son of Bharata! In all these respects my strength is greater and that of the Pandavas is much less; knowing this you should not be anxious and impatient. ॥ 68॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥