श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 55: धृतराष्ट्रको धैर्य देते हुए दुर्योधनद्वारा अपने उत्कर्ष और पाण्डवोंके अपकर्षका वर्णन  »  श्लोक 68
 
 
श्लोक  5.55.68 
एतत् सर्वं समाज्ञाय बलाग्रॺं मम भारत।
न्यूनतां पाण्डवानां च न मोहं गन्तुमर्हसि॥ ६८॥
 
 
अनुवाद
हे भरतपुत्र! इन सब बातों में मेरा बल अधिक है और पाण्डवों का बल बहुत कम है; ऐसा जानकर तुम्हें चिन्ता और अधीरता नहीं करनी चाहिए ॥ 68॥
 
O son of Bharata! In all these respects my strength is greater and that of the Pandavas is much less; knowing this you should not be anxious and impatient. ॥ 68॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)