श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 55: धृतराष्ट्रको धैर्य देते हुए दुर्योधनद्वारा अपने उत्कर्ष और पाण्डवोंके अपकर्षका वर्णन  »  श्लोक 66
 
 
श्लोक  5.55.66 
बलं त्रिगुणतो हीनं योध्यं प्राह बृहस्पति:।
परेभ्यस्त्रिगुणा चेयं मम राजन्ननीकिनी॥ ६६॥
 
 
अनुवाद
महाराज! बृहस्पति कहते हैं कि यदि शत्रु की सेना हमारी सेना से एक-तिहाई भी कम हो, तो हमें उनसे युद्ध करना चाहिए। किन्तु मेरी सेना तो शत्रु की सेना से चार अक्षौहिणी अधिक है, अतः यह अन्तर मेरी सम्पूर्ण सेना के एक-तिहाई से भी अधिक है।
 
King! Brihaspati says that if the enemy's army is even one-third smaller than ours, then we must fight with them. But my army is four Akshauhinis more than the enemy's, so this difference is more than one-third of my entire army. 66.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)