श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 55: धृतराष्ट्रको धैर्य देते हुए दुर्योधनद्वारा अपने उत्कर्ष और पाण्डवोंके अपकर्षका वर्णन  »  श्लोक 48-49h
 
 
श्लोक  5.55.48-49h 
ब्रह्मर्षेश्च भरद्वाजाद् द्रोणो द्रोण्यामजायत॥ ४८॥
द्रोणाज्जज्ञे महाराज द्रौणिश्च परमास्त्रवित्।
 
 
अनुवाद
दूसरे वीर गुरु द्रोण हैं, जो ब्रह्मर्षि भारद्वाज के वीर्य से एक घड़े में उत्पन्न हुए थे। महाराज! इन्हीं आचार्य द्रोण से वीर अश्वत्थामा उत्पन्न हुए, जो अस्त्र-शस्त्र विद्या में महान् निपुण हैं। 48 1/2॥
 
The second brave teacher is Drona, who was born in a pot from the semen of Brahmarishi Bhardwaj. Maharaj! It is from this Acharya Drona that the brave Ashwatthama was born, who is a great expert in the art of weapons. 48 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)