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mahabharat 5.55.43-44h: भारत भीष्म, द्रोण, कृपा, अश्वत्थामा, कर्ण, भूरिश्रवा, प्रागज्योतिष के राजा भगदत्त, मद्र के राजा शल्य और सिंधु के राजा जयद्रथ - इनमें से प्रत्येक योद्धा में सभी पांडवों को मारने की शक्ति है। यदि ये सब एकत्र हो जाएं तो वे उन सबको एक ही क्षण में यमलोक भेज देंगे। 43 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 5.55: धृतराष्ट्रको धैर्य देते हुए दुर्योधनद्वारा अपने उत्कर्ष और पाण्डवोंके अपकर्षका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 55: धृतराष्ट्रको धैर्य देते हुए दुर्योधनद्वारा अपने उत्कर्ष और पाण्डवोंके अपकर्षका वर्णन  »  श्लोक 43-44h
 
 
श्लोक  5.55.43-44h 
भीष्मो द्रोण: कृपो द्रौणि: कर्णो भूरिश्रवास्तथा।
प्राग्ज्योतिषाधिप: शल्य: सिन्धुराजो जयद्रथ:॥ ४३॥
एकैक एषां शक्तस्तु हन्तुं भारत पाण्डवान्।
समेतास्तु क्षणेनैतान् नेष्यन्ति यमसादनम्।
 
 
अनुवाद
भारत भीष्म, द्रोण, कृपा, अश्वत्थामा, कर्ण, भूरिश्रवा, प्रागज्योतिष के राजा भगदत्त, मद्र के राजा शल्य और सिंधु के राजा जयद्रथ - इनमें से प्रत्येक योद्धा में सभी पांडवों को मारने की शक्ति है। यदि ये सब एकत्र हो जाएं तो वे उन सबको एक ही क्षण में यमलोक भेज देंगे। 43 1/2॥
 
India Bhishma, Drona, Kripa, Ashwatthama, Karna, Bhurishrava, King of Pragjyotish Bhagadatt, King Shalya of Madra and King Jayadratha of Sindhu - each of these warriors has the power to kill all the Pandavas. If all these come together, they will send them all to Yamalok in a moment. 43 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)