श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 55: धृतराष्ट्रको धैर्य देते हुए दुर्योधनद्वारा अपने उत्कर्ष और पाण्डवोंके अपकर्षका वर्णन  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  5.55.41 
तत् ते वृकोदरमयं भयं व्येतु महाहवे।
व्यपनेष्याम्यहं ह्येनं मा राजन् विमना भव॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
अतः हे राजन! भीमसेन के विषय में जो भय तुम्हें हो रहा है, वह दूर हो जाए। मैं उसे महायुद्ध में मार डालूँगा। अतः तुम मन में शोक मत करो। ॥41॥
 
Therefore, O King, the fear you are having about Bhimasena should go away. I will kill him in the great war. Therefore, do not feel sad in your heart. ॥ 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)