vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 5: उद्योग पर्व
»
अध्याय 55: धृतराष्ट्रको धैर्य देते हुए दुर्योधनद्वारा अपने उत्कर्ष और पाण्डवोंके अपकर्षका वर्णन
»
श्लोक 4
श्लोक
5.55.4
इन्द्रप्रस्थस्य चादूरात् समाजग्मुर्महारथा:।
व्यगर्हयंश्च संगम्य भवन्तं कुरुभि: सह॥ ४॥
अनुवाद
वे सभी महारथी इन्द्रप्रस्थ के निकट आये और सभी कौरवों के साथ मिलकर आपकी निन्दा करने लगे।
All those great warriors came near Indraprastha and together they began to criticize you along with all the Kauravas.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×