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श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 55: धृतराष्ट्रको धैर्य देते हुए दुर्योधनद्वारा अपने उत्कर्ष और पाण्डवोंके अपकर्षका वर्णन  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  5.55.39 
गदाप्रहाराभिहतो हिमवानपि पर्वत:।
सकृन्मया विदीर्येत गिरि: शतसहस्रधा॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
यदि मैं एक बार अपनी गदा का प्रहार करूँ तो हिमालय पर्वत भी लाखों टुकड़ों में टूट जाएगा।
 
If I strike my mace once, even the Himalaya mountain will break into millions of pieces. 39.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)