श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 55: धृतराष्ट्रको धैर्य देते हुए दुर्योधनद्वारा अपने उत्कर्ष और पाण्डवोंके अपकर्षका वर्णन  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  5.55.32 
मत्समो हि गदायुद्धे पृथिव्यां नास्ति कश्चन।
नासीत् कश्चिदतिक्रान्तो भविता न च कश्चन॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
इस पृथ्वी पर गदायुद्ध में मेरी बराबरी करनेवाला कोई नहीं है; न तो पहले कोई था और न आगे कोई होगा ॥32॥
 
There is no one on this earth who can equal me in mace fighting; neither was there any in the past nor will there be any in the future. ॥ 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)