श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 55: धृतराष्ट्रको धैर्य देते हुए दुर्योधनद्वारा अपने उत्कर्ष और पाण्डवोंके अपकर्षका वर्णन  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  5.55.28 
एषां ह्येकैकशो राज्ञां समर्थ: पाण्डवान् प्रति।
आत्मानं मन्यते सर्वो व्येतु ते भयमागतम्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
इनमें से प्रत्येक राजा अपने को पाण्डवों से युद्ध करने में समर्थ समझता है; इसलिए तुम्हारे मन में जो भय उत्पन्न हुआ है, वह दूर हो जाए ॥ 28॥
 
Each of these kings considers himself capable of fighting the Pandavas; therefore the fear that has crept into your mind should go away. ॥ 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)