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mahabharat 5.55.26: हे शत्रुओं को पीड़ा देने वाले, हे कौरवश्रेष्ठ! निश्चिंत रहो कि यहाँ उपस्थित ये सभी राजा मेरे लिए जलती हुई अग्नि में प्रवेश कर सकते हैं अथवा समुद्र में भी कूद सकते हैं॥ 26॥   |   mahabharat अध्याय 5.55: धृतराष्ट्रको धैर्य देते हुए दुर्योधनद्वारा अपने उत्कर्ष और पाण्डवोंके अपकर्षका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.55.26 
अप्यग्निं प्रविशेयुस्ते समुद्रं वा परंतप।
मदर्थं पार्थिवा: सर्वे तद् विद्धि कुरुसत्तम॥ २६॥
 
 
अनुवाद
हे शत्रुओं को पीड़ा देने वाले, हे कौरवश्रेष्ठ! निश्चिंत रहो कि यहाँ उपस्थित ये सभी राजा मेरे लिए जलती हुई अग्नि में प्रवेश कर सकते हैं अथवा समुद्र में भी कूद सकते हैं॥ 26॥
 
O best of the Kurus, who torments the enemies! Be assured that all these kings present here can enter a burning fire or even jump into the ocean for my sake.॥ 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)