श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 55: धृतराष्ट्रको धैर्य देते हुए दुर्योधनद्वारा अपने उत्कर्ष और पाण्डवोंके अपकर्षका वर्णन  »  श्लोक 23-24
 
 
श्लोक  5.55.23-24 
इत्येषां निश्चयो ह्यासीत् तत्कालेऽमिततेजसाम्।
पुरा परेषां पृथिवी कृत्स्नाऽऽसीद् वशवर्तिनी॥ २३॥
अस्मान् पुनरमी नाद्य समर्था जेतुमाहवे।
छिन्नपक्षा: परे ह्यद्य वीर्यहीनाश्च पाण्डवा:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
इन महातेजस्वी भीष्म आदि ने उस समय युद्ध में हमारा साथ देने का निश्चय किया था। पहले यह सम्पूर्ण पृथ्वी हमारे शत्रुओं के अधीन थी, किन्तु अब यह हमारे हाथ में आ गई है। हमारे इन शत्रुओं में अब हमें युद्ध में परास्त करने की शक्ति नहीं रही। सहायकों के अभाव में पाण्डव पंख कटे पक्षियों के समान असहाय और शक्तिहीन हो गए हैं॥23-24॥
 
These immensely illustrious Bhishma and others had then resolved to support us in the war. Earlier this entire earth was under the control of our enemies, but now it has come into our hands. These enemies of ours no longer have the power to defeat us in war. In the absence of helpers, the Pandavas have become helpless and devoid of power like birds with clipped wings.॥23-24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)