श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 55: धृतराष्ट्रको धैर्य देते हुए दुर्योधनद्वारा अपने उत्कर्ष और पाण्डवोंके अपकर्षका वर्णन  »  श्लोक 2-3
 
 
श्लोक  5.55.2-3 
वने प्रव्राजितान् पार्थान् यदाऽऽयान्मधुसूदन:।
महता बलचक्रेण परराष्ट्रावमर्दिना॥ २॥
केकया धृष्टकेतुश्च धृष्टद्युम्नश्च पार्षत:।
राजानश्चान्वयु: पार्थान् बहवोऽन्येऽनुयायिन:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
जब हमने पाण्डवों को वन में भेज दिया, तब श्रीकृष्ण शत्रु राष्ट्रों का संहार करने वाली विशाल सेना लेकर यहाँ आये थे। उनके साथ राजकुमार केकय, धृष्टकेतु, द्रुपदपुत्र धृष्टद्युम्न तथा पाण्डवों के अनुयायी अन्य अनेक राजा भी यहाँ आये थे।॥2-3॥
 
When we sent the Pandavas to the forest, Shri Krishna came here with a huge army that crushed the enemy nations. Prince Kekaya, Dhrishtaketu, son of Drupada Dhrishtadyumna and many other kings, who are followers of the Pandavas, also came here with him.॥2-3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)