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mahabharat 5.54.7: महाराज! कुरुजांगल देश तो आपका पैतृक राज्य है, किन्तु शेष पृथ्वी तो वीर पाण्डवों द्वारा जीती हुई है, जिसे आपने प्राप्त कर लिया है।   |   mahabharat अध्याय 5.54: संजयका धृतराष्ट्रको उनके दोष बताते हुए दुर्योधनपर शासन करनेकी सलाह देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 54: संजयका धृतराष्ट्रको उनके दोष बताते हुए दुर्योधनपर शासन करनेकी सलाह देना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  5.54.7 
पित्र्यं राज्यं महाराज कुरवस्ते सजाङ्गला:।
अथ वीरैर्जितामुर्वीमखिलां प्रत्यपद्यथा:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
महाराज! कुरुजांगल देश तो आपका पैतृक राज्य है, किन्तु शेष पृथ्वी तो वीर पाण्डवों द्वारा जीती हुई है, जिसे आपने प्राप्त कर लिया है।
 
Maharaj! The Kurujangal country is your ancestral kingdom, but the rest of the earth has been conquered by the valiant Pandavas, which you have acquired.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)