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यदिदं ते विलपितं पाण्डवान् प्रति भारत।
अनीशेनेव राजेन्द्र सर्वमेतन्निरर्थकम्॥ २२॥
अनुवाद
राजन! आपने पाण्डवों के बल और पराक्रम की चर्चा करके असहाय की भाँति जो विलाप किया है, वह सब व्यर्थ है।
King! All the lamentation you have done after discussing the might and valour of the Pandavas, like a helpless person, is all in vain.
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि यानसंधिपर्वणि संजयवाक्ये चतुष्पञ्चाशत्तमोऽध्याय:॥ ५४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत यानसंधिपर्वमें संजयवाक्यविषयक चौवनवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ५४॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥