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mahabharat 5.54.2: परन्तु मैं यह नहीं समझ पा रहा हूँ कि आप जो सदा बुद्धिमान माने जाते हैं, सव्यसाची अर्जुन के बल और पराक्रम को भली-भाँति जानते हुए भी अपने पुत्रों के अधीन क्यों हैं? ॥2॥   |   mahabharat अध्याय 5.54: संजयका धृतराष्ट्रको उनके दोष बताते हुए दुर्योधनपर शासन करनेकी सलाह देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 54: संजयका धृतराष्ट्रको उनके दोष बताते हुए दुर्योधनपर शासन करनेकी सलाह देना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  5.54.2 
इदं तु नाभिजानामि तव धीरस्य नित्यश:।
यत् पुत्रवशमागच्छेस्तत्त्वज्ञ: सव्यसाचिन:॥ २॥
 
 
अनुवाद
परन्तु मैं यह नहीं समझ पा रहा हूँ कि आप जो सदा बुद्धिमान माने जाते हैं, सव्यसाची अर्जुन के बल और पराक्रम को भली-भाँति जानते हुए भी अपने पुत्रों के अधीन क्यों हैं? ॥2॥
 
But I am unable to understand you, who are always considered wise, why are you submitting yourself to your sons even though you know full well about the might and prowess of Savyasachi Arjuna? ॥2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)