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mahabharat 5.54.17-18: मत्स्यदेश के क्षत्रिय अब तुम्हारा आदर नहीं करते। पांचाल, केकय, शाल्व और शूरसेन देश के समस्त राजा और राजकुमार तुम्हारी उपेक्षा करते हैं। वे सब परम बुद्धिमान अर्जुन के पराक्रम को जानते हैं और इसीलिए उसके पक्ष में आ गए हैं॥17-18॥   |   mahabharat अध्याय 5.54: संजयका धृतराष्ट्रको उनके दोष बताते हुए दुर्योधनपर शासन करनेकी सलाह देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 54: संजयका धृतराष्ट्रको उनके दोष बताते हुए दुर्योधनपर शासन करनेकी सलाह देना  »  श्लोक 17-18
 
 
श्लोक  5.54.17-18 
मत्स्यास्त्वामद्य नार्चन्ति पञ्चालाश्च सकेकया:॥ १७॥
शाल्वेया: शूरसेनाश्च सर्वे त्वामवजानते।
पार्थं ह्येते गता: सर्वे वीर्यज्ञास्तस्य धीमत:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
मत्स्यदेश के क्षत्रिय अब तुम्हारा आदर नहीं करते। पांचाल, केकय, शाल्व और शूरसेन देश के समस्त राजा और राजकुमार तुम्हारी उपेक्षा करते हैं। वे सब परम बुद्धिमान अर्जुन के पराक्रम को जानते हैं और इसीलिए उसके पक्ष में आ गए हैं॥17-18॥
 
The Kshatriyas of Matsyadesh do not respect you anymore. All the kings and princes of Panchala, Kekaya, Shalva and Shurasena countries ignore you. They all know the prowess of the most intelligent Arjuna and have therefore joined his side.॥17-18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)