Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.53.8-12: पाण्डु नन्दन युधिष्ठिर सुन्दर, बुद्धिमान, धन-धान्य से युक्त, ब्रह्मऋषियों के समान तेजस्वी, तेजस्वी, निश्चित बुद्धि से युक्त, धर्मात्मा, मित्रों और मन्त्रियों से युक्त, युद्ध के लिए परिश्रमी सैनिकों से युक्त, पराक्रमी बंधुओं और वीर श्वसुरों से सुरक्षित, धैर्यवान, अपनी सम्मति को गुप्त रखने वाले, पुरुषों में सिंह के समान पराक्रमी, दयालु, उदार, लज्जाशील, सच्चे पराक्रम से युक्त, अनेक शास्त्रों के ज्ञाता, मन को वश में रखने वाले, वृद्धों की सहायता करने वाले और जितेन्द्रिय हैं। इस प्रकार सर्वगुण सम्पन्न और प्रज्वलित अग्नि के समान ताप देने वाले युधिष्ठिर के सामने कौन मूर्ख युद्ध करने जा सकेगा? कौन मूर्छित और मरता हुआ मनुष्य पतंगों के समान पाण्डवों की अक्षय अग्नि में जान-बूझकर गिरेगा? 8-12॥ | mahabharat अध्याय 5.53: कौरवसभामें धृतराष्ट्रका युद्धसे भय दिखाकर शान्तिके लिये प्रस्ताव करना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दर्शनीयो मनस्वी च लक्ष्मीवान् ब्रह्मवर्चसी।
मेधावी सुकृतप्रज्ञो धर्मात्मा पाण्डुनन्दन:॥ ८॥
मित्रामात्यै: सुसम्पन्न: सम्पन्नो युद्धयोजकै:।
भ्रातृभि: श्वशुरैर्वीरैरुपपन्नो महारथै:॥ ९॥
धृत्या च पुरुषव्याघ्रो नैभृत्येन च पाण्डव:।
अनृशंसो वदान्यश्च ह्रीमान् सत्यपराक्रम:॥ १०॥
बहुश्रुत: कृतात्मा च वृद्धसेवी जितेन्द्रिय:।
तं सर्वगुणसम्पन्नं समिद्धमिव पावकम्॥ ११॥
तपन्तमभि को मन्द: पतिष्यति पतङ्गवत्।
पाण्डवाग्निमनावार्यं मुमूर्षुर्नष्टचेतन:॥ १२॥
अनुवाद
पाण्डु नन्दन युधिष्ठिर सुन्दर, बुद्धिमान, धन-धान्य से युक्त, ब्रह्मऋषियों के समान तेजस्वी, तेजस्वी, निश्चित बुद्धि से युक्त, धर्मात्मा, मित्रों और मन्त्रियों से युक्त, युद्ध के लिए परिश्रमी सैनिकों से युक्त, पराक्रमी बंधुओं और वीर श्वसुरों से सुरक्षित, धैर्यवान, अपनी सम्मति को गुप्त रखने वाले, पुरुषों में सिंह के समान पराक्रमी, दयालु, उदार, लज्जाशील, सच्चे पराक्रम से युक्त, अनेक शास्त्रों के ज्ञाता, मन को वश में रखने वाले, वृद्धों की सहायता करने वाले और जितेन्द्रिय हैं। इस प्रकार सर्वगुण सम्पन्न और प्रज्वलित अग्नि के समान ताप देने वाले युधिष्ठिर के सामने कौन मूर्ख युद्ध करने जा सकेगा? कौन मूर्छित और मरता हुआ मनुष्य पतंगों के समान पाण्डवों की अक्षय अग्नि में जान-बूझकर गिरेगा? 8-12॥
Pandanu Nandan Yudhishthir is beautiful, intelligent, blessed with wealth, brilliant like Brahmarishis, brilliant, endowed with sure intelligence, pious, blessed with friends and ministers, united with industrious soldiers for war, safe from mighty brothers and brave father-in-laws, patient, one who keeps his advice secret, as mighty as a lion among men, kind, generous, shy, full of true valor, many He is knowledgeable in the scriptures, has control over the mind, helps the elderly and is a Jitendriya. In this way, which fool would be able to go to fight in front of Yudhishthira, who is full of all qualities and gives heat like burning fire? Which unconscious and dying person would knowingly fall into the inexhaustible fire of Pandava like kites? 8-12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥