श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 53: कौरवसभामें धृतराष्ट्रका युद्धसे भय दिखाकर शान्तिके लिये प्रस्ताव करना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  5.53.2 
त्वमेव हि पराक्रान्तानाचक्षीथा: परान् मम।
पञ्चालान् केकयान् मत्स्यान् मागधान् वत्सभूमिपान्॥ २॥
 
 
अनुवाद
तुमने मुझे शक्तिशाली पांचाल, केकय, मत्स्य, मगध और वत्स क्षेत्र के श्रेष्ठ राजाओं के नाम बताये हैं - (ये सभी पाण्डवों की विजय चाहते हैं।)
 
You have mentioned to me the names of the mighty Panchalas, Kekayas, Matsyas, Magadhas and the excellent kings of the Vatsa region - (all of them want victory for the Pandavas.)
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)